अजनबी इतिहास
स्वतन्त्र भारत में बनी 250 सीसी क्षमता वाली टू स्ट्रोक रेसिंग मोटरसाइकिल थी। सन् 1960 में मैसूर शहर (वर्तमान कर्नाटक प्रान्त) में फारूक ईरानी द्वारा स्थापित आइडियल जावा (इण्डिया) लिमिटेड ने इसे चेकोस्लोवाकिया की कम्पनी जावा मोटर्स से लाइसेंस लेकर बनाया था। उस समय 250 सीसी मॉडल में ईंधन की खपत के लिहाज से यह सर्वोत्तम मोटरसाइकिल थी जो 3 लीटर पेट्रोल में 100 किलोमीटर की दूरी तय करती थी। 1970 से लेकर 1990 के दशक तक पूरे 30 साल रेसिंग मोटरसाइकिलों में इसका कोई मुकाबला नहीं था। दो स्ट्रोक और दो साइलेंसर वाली यह अनूठी मोटरसाइकिल थी जिसके सभी कलपुर्जे कवर्ड हुआ करते थे। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसके किक स्टार्टर से ही गीयर बदलने का काम हो जाता था। इसके अलावा इसका रखरखाव भी बहुत ही सस्ता और आसान था। अमूमन इसे किसी मोटर मकेनिक के पास ले जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। 1960 से 1974 तक पूरे पन्द्रह साल जावा ब्राण्ड से यह भारत में बनायी गयी बाद में ब्राण्ड और मॉडल बदल कर येज़दी हो गया। परन्तु भारतीय बाजार में ग्लोबलाइजेशन एवं विश्व व्यापार संगठन के कठोर मापदण्डों के कारण सन् 1996 में इसकी निर्माता कम्पनी को इसका उत्पादन बन्द करने के लिये बाध्य होना पड़ा।
यद्यपि जावा मोटरसाइकिल बनाने वाली कम्पनी को बन्द हुए बरसों हो चुके हैं फिर भी मैसूरवासियों के लिये आज भी जावा मोटर साइकिल सिर्फ़ एक बाइक ही नहीं बल्कि बहुत कुछ है। जावा शब्द इसके चेकोस्लोवाकियन संस्थापक जानीक फ्रांटिसेक और वांडरर के नाम के पहले दो-दो अक्षरों जा और वा को मिलाकर बनाया गया था। आज भी कर्नाटक प्रान्त में रहने वालों को इस मोटर साइकिल के नाम में मैसूर के एक प्रतापी राजा जायचमाराजेन्द्र वाडियार की स्मृति झलकती है।[2] मैसूर राज्य में आज भी प्रति वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय जावा येज़दी दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है जिसमें सन् 1945 के चेक जावा मॉडल से लेकर येज़दी 350 तक की सैकड़ों विण्टेज मोटरसाइकिलें सड़कों पर दौड़ती नज़र आती हैं।
इतिहास
भारत में स्थापित इस कम्पनी द्वारा शुरुआत में जावा के केवल दो ही मॉडल बाजार में लाये गये जिनका लाइसेंस जावा मोटर्स चेकोस्लोवाकिया से लिया गया था मूल रूप से चेकोस्लोवाकिया की एक कम्पनी जावा मोटर्स से लाइसेंस प्राप्त कर यह मोटरसाइकिल भारत में बनायी गयी थी। "फॉरएवर बाइक-फॉरएवर वैल्यू" के आकर्षक विज्ञापन के साथ भारतीय बाजारों में उतारी गयी यह मोटर साइकिल युवाओं की पहली पसन्द थी। इसके पुर्ज़े चेकोस्लोवाकिया से ही आयात किये जाते थे। बाद में इसकी निर्माता कम्पनी आइडियल जावा (इण्डिया) लिमिटेड ने अपना ब्राण्ड जावा से बदल कर येज़दी कर दिया। भारत की इस कम्पनी ने ये मोटरसाइकिलें न केवल देश में बेचीं अपितु तुर्की, नाइजीरिया, श्रीलंका, मिस्र और ग्वाटेमाला जैसे 61 देशों को निर्यात भी कीं। सफेद रंग की येज़दी रोडकिंग मोटरसाइकिल तो ग्वाटेमाला में केवल पुलिस के प्रयोग हेतु ही निर्यात की जाती थी। कालान्तर में इसका एक और मॉडल येज़दी 250 MT नाम से बनाया गया। यह मॉडल विशेष रूप से पर्वतारोहियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इसे वेनेज़ुएला को निर्यात किया जाता था।
मोटरसाइकिल रैली में प्रतिभागिता
भारत में इसकी निर्माता कम्पनी ने शोलावरम में एक रेसिंग टीम भी बनायी हुई थी जो इस मोटरसाइकिल को नेशनल मोटरसाइकिल रैली चैम्पियनशिप में भेजा करती थी। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि कई वर्षों तक लगातार सभी मुकाबलों में जावा मोटरसाइकिल ही जीतती रही। "जावा को केवल जावा ही हरा सकती है, कोई दूसरी मोटरसाइकिल नहीं" यह जुमला उन दिनों एक मुहावरा बन गया था।
भारत में आने से पूर्व
भारत में जावा मोटरसाइकिल बनाने का लाइसेंस देने से पूर्व सन् 1952 से 1958 तक जावा मोटर्स कम्पनी ने 500 सीसी OHC टाइप 15 मोटरसाइकिल भी बनायी थी। यह फोर स्ट्रोक मोटरसाइकिल थी परन्तु अत्यधिक मँहगी होने व अविश्वसनीय गुणवत्ता के कारण कामयाब नहीं हुई। इसकी असफलता से सीख लेकर बाद में जावा ने टू स्ट्रोक मॉडल में 250 सीसी की कई बाइक्स भारत में बनायीं। 3 लीटर पेट्रोल में 100 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली जावा व येज़दी मोटरसाइकिलें अपने बेहतर मापदण्डों व आकर्षक मॉडलों के कारण कई दशकों तक न केवल देशी अपितु विदेशी बाजार में भी छायी रहीं।
लोकप्रिय
भारत में भले ही जावा मोटरसाइकिल का उत्पादन बन्द हो गया हो परन्तु यूनाइटेड किंगडम में आज भी इसका एक समुन्नत मॉडल जावा 350 सीसी टू स्ट्रोक क्लासिक व स्पोर्टस 2012 जैसे दो नामों से लॉन्च किया गया है। पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक इग्नीशन, इलेक्ट्रिक स्टार्टर व ऑटोमैटिक पम्प ऑयल इंजेक्शन जैसी अत्यानुधिक सुविधाओं से युक्त जावा का यह मॉडल आयरलैण्ड द्वारा अपने यहाँ आयातित करके यूरोप के अधिकांश देशों में बेचा जाता है।
अन्तर्राष्ट्रीय दिवस
इसकी निर्माता कम्पनी आइडियल जावा (इण्डिया) लिमिटेड द्वारा नेशनल नोटरसाइकिल रैली चैम्पियनशिप के लिये विशेष रूप से बनायी गयी फैक्ट्री-टीम के अलावा मैसूर में इसके शौकीनों ने जावा फ्राइण्ड्स क्लब भी बनाया हुआ है। इस क्लब के द्वारा प्रति वर्ष जुलाई के दूसरे रविवार को अन्तर्राष्ट्रीय जावा दिवस धूमधाम से मनाया जाता है जिसमे केवल जावा और येज़दी मोटरसाइकिलें ही शामिल की जाती हैं।
और अधिक जानकारी के लिए बने रहे।
स्वतन्त्र भारत में बनी 250 सीसी क्षमता वाली टू स्ट्रोक रेसिंग मोटरसाइकिल थी। सन् 1960 में मैसूर शहर (वर्तमान कर्नाटक प्रान्त) में फारूक ईरानी द्वारा स्थापित आइडियल जावा (इण्डिया) लिमिटेड ने इसे चेकोस्लोवाकिया की कम्पनी जावा मोटर्स से लाइसेंस लेकर बनाया था। उस समय 250 सीसी मॉडल में ईंधन की खपत के लिहाज से यह सर्वोत्तम मोटरसाइकिल थी जो 3 लीटर पेट्रोल में 100 किलोमीटर की दूरी तय करती थी। 1970 से लेकर 1990 के दशक तक पूरे 30 साल रेसिंग मोटरसाइकिलों में इसका कोई मुकाबला नहीं था। दो स्ट्रोक और दो साइलेंसर वाली यह अनूठी मोटरसाइकिल थी जिसके सभी कलपुर्जे कवर्ड हुआ करते थे। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसके किक स्टार्टर से ही गीयर बदलने का काम हो जाता था। इसके अलावा इसका रखरखाव भी बहुत ही सस्ता और आसान था। अमूमन इसे किसी मोटर मकेनिक के पास ले जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। 1960 से 1974 तक पूरे पन्द्रह साल जावा ब्राण्ड से यह भारत में बनायी गयी बाद में ब्राण्ड और मॉडल बदल कर येज़दी हो गया। परन्तु भारतीय बाजार में ग्लोबलाइजेशन एवं विश्व व्यापार संगठन के कठोर मापदण्डों के कारण सन् 1996 में इसकी निर्माता कम्पनी को इसका उत्पादन बन्द करने के लिये बाध्य होना पड़ा।
यद्यपि जावा मोटरसाइकिल बनाने वाली कम्पनी को बन्द हुए बरसों हो चुके हैं फिर भी मैसूरवासियों के लिये आज भी जावा मोटर साइकिल सिर्फ़ एक बाइक ही नहीं बल्कि बहुत कुछ है। जावा शब्द इसके चेकोस्लोवाकियन संस्थापक जानीक फ्रांटिसेक और वांडरर के नाम के पहले दो-दो अक्षरों जा और वा को मिलाकर बनाया गया था। आज भी कर्नाटक प्रान्त में रहने वालों को इस मोटर साइकिल के नाम में मैसूर के एक प्रतापी राजा जायचमाराजेन्द्र वाडियार की स्मृति झलकती है।[2] मैसूर राज्य में आज भी प्रति वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय जावा येज़दी दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है जिसमें सन् 1945 के चेक जावा मॉडल से लेकर येज़दी 350 तक की सैकड़ों विण्टेज मोटरसाइकिलें सड़कों पर दौड़ती नज़र आती हैं।
इतिहास
भारत में स्थापित इस कम्पनी द्वारा शुरुआत में जावा के केवल दो ही मॉडल बाजार में लाये गये जिनका लाइसेंस जावा मोटर्स चेकोस्लोवाकिया से लिया गया था मूल रूप से चेकोस्लोवाकिया की एक कम्पनी जावा मोटर्स से लाइसेंस प्राप्त कर यह मोटरसाइकिल भारत में बनायी गयी थी। "फॉरएवर बाइक-फॉरएवर वैल्यू" के आकर्षक विज्ञापन के साथ भारतीय बाजारों में उतारी गयी यह मोटर साइकिल युवाओं की पहली पसन्द थी। इसके पुर्ज़े चेकोस्लोवाकिया से ही आयात किये जाते थे। बाद में इसकी निर्माता कम्पनी आइडियल जावा (इण्डिया) लिमिटेड ने अपना ब्राण्ड जावा से बदल कर येज़दी कर दिया। भारत की इस कम्पनी ने ये मोटरसाइकिलें न केवल देश में बेचीं अपितु तुर्की, नाइजीरिया, श्रीलंका, मिस्र और ग्वाटेमाला जैसे 61 देशों को निर्यात भी कीं। सफेद रंग की येज़दी रोडकिंग मोटरसाइकिल तो ग्वाटेमाला में केवल पुलिस के प्रयोग हेतु ही निर्यात की जाती थी। कालान्तर में इसका एक और मॉडल येज़दी 250 MT नाम से बनाया गया। यह मॉडल विशेष रूप से पर्वतारोहियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इसे वेनेज़ुएला को निर्यात किया जाता था।
मोटरसाइकिल रैली में प्रतिभागिता
भारत में इसकी निर्माता कम्पनी ने शोलावरम में एक रेसिंग टीम भी बनायी हुई थी जो इस मोटरसाइकिल को नेशनल मोटरसाइकिल रैली चैम्पियनशिप में भेजा करती थी। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि कई वर्षों तक लगातार सभी मुकाबलों में जावा मोटरसाइकिल ही जीतती रही। "जावा को केवल जावा ही हरा सकती है, कोई दूसरी मोटरसाइकिल नहीं" यह जुमला उन दिनों एक मुहावरा बन गया था।
भारत में आने से पूर्व
भारत में जावा मोटरसाइकिल बनाने का लाइसेंस देने से पूर्व सन् 1952 से 1958 तक जावा मोटर्स कम्पनी ने 500 सीसी OHC टाइप 15 मोटरसाइकिल भी बनायी थी। यह फोर स्ट्रोक मोटरसाइकिल थी परन्तु अत्यधिक मँहगी होने व अविश्वसनीय गुणवत्ता के कारण कामयाब नहीं हुई। इसकी असफलता से सीख लेकर बाद में जावा ने टू स्ट्रोक मॉडल में 250 सीसी की कई बाइक्स भारत में बनायीं। 3 लीटर पेट्रोल में 100 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली जावा व येज़दी मोटरसाइकिलें अपने बेहतर मापदण्डों व आकर्षक मॉडलों के कारण कई दशकों तक न केवल देशी अपितु विदेशी बाजार में भी छायी रहीं।
लोकप्रिय
भारत में भले ही जावा मोटरसाइकिल का उत्पादन बन्द हो गया हो परन्तु यूनाइटेड किंगडम में आज भी इसका एक समुन्नत मॉडल जावा 350 सीसी टू स्ट्रोक क्लासिक व स्पोर्टस 2012 जैसे दो नामों से लॉन्च किया गया है। पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक इग्नीशन, इलेक्ट्रिक स्टार्टर व ऑटोमैटिक पम्प ऑयल इंजेक्शन जैसी अत्यानुधिक सुविधाओं से युक्त जावा का यह मॉडल आयरलैण्ड द्वारा अपने यहाँ आयातित करके यूरोप के अधिकांश देशों में बेचा जाता है।
अन्तर्राष्ट्रीय दिवस
इसकी निर्माता कम्पनी आइडियल जावा (इण्डिया) लिमिटेड द्वारा नेशनल नोटरसाइकिल रैली चैम्पियनशिप के लिये विशेष रूप से बनायी गयी फैक्ट्री-टीम के अलावा मैसूर में इसके शौकीनों ने जावा फ्राइण्ड्स क्लब भी बनाया हुआ है। इस क्लब के द्वारा प्रति वर्ष जुलाई के दूसरे रविवार को अन्तर्राष्ट्रीय जावा दिवस धूमधाम से मनाया जाता है जिसमे केवल जावा और येज़दी मोटरसाइकिलें ही शामिल की जाती हैं।
और अधिक जानकारी के लिए बने रहे।









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