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कंप्यूटर का विकास

                                            

                                             कंप्यूटर का विकास





 कंप्यूटर का इतिहास (History of Computers): कंप्यूटर का इतिहास पुराना है,                                   
लेकिन भारत के संदर्भ में देखें   तो कंप्यूटर पूर्ण रूप से 19वी शताब्दी में विकसित हुआ.

कंप्यूटर का इतिहास (History of Computers)






 अबाकस (Abacus): अबाकस विश्व का पहला कंप्यूटर है, इसका शुरुआती दौर में सिर्फ गणना करना होता था.

आरंभिक अबाकस का अविष्कार प्राचीन बेबीलोन में हुआ, परन्तु इसके एडवांस रूप का विकास चीन में हुआ.
आधुनिक शोधों से पता चलता है कि इसका अविष्कार ली काई चेन (Lee Kai Chen) ने किया था. Abacus के
ढांचे की बात करें तो यह आयताकार होता था जिसके अन्दर तारों का एक फ्रेम लगा होता है.

नेपियर बोंस (Napier Bones): नेपियर बोंस का अविष्कार स्कॉटलैंड के गणितज्ञ जॉन नेपिअर ने किया था.

इसके अविष्कार होने से गुणा करने कि क्रिया में काफ़ी आसानी हुई, नेपियर बोंस में दस पट्टियाँ होती थी जिन
पर क्रमशः 0 से 9 तक के पहाड़े अंकित होते थे.

स्लाइड रुल (Slide Rule): शुरुआती दिनों से ही कंप्यूटर के देवेलोप्मेंट में गणितज्ञ का बड़ा हाथ रहा है,
स्लाइड रूल का भी अविष्कार एक गणितज्ञ ने ही किया था वे ज़र्मनी से ताल्लुकात रखते थे नाम था
विलियम आउटरेड




यह यंत्र लघुगणक विधि के आधार पर सरलता से गणनाए कर सकता था.

बीसवी शताब्दी के आठवे दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स पॉकेट कैलकुलेटर के अस्तित्व में आने के पश्चात् इसका
प्रयोग बंद हो गया.

पास्कल कैलकुलेटर (Pascal Calculator): प्रथम गणना मशीन (Mechanical Calculator) का निर्माण
सन 1645 में फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज़ पास्कल (Blaise Pascal) किया था.

इस कैलकुलेटर में इंटरलॉकिंग गियर्स का उपयोग किया गया था, जो 0 से 9 संख्या को दर्शाता था. यह केवल
जोड़ घटाव में ही सक्षम था.

लिब्निज का यांत्रिक कैलकुलेटर (Mechanical Calculator of Leibnitz): जर्मन गणितज्ञ गोटफ्रेड वान
लिब्निज ने यांत्रिक कैलकुलेटर (Mechanical Calculator) का अविष्कार किया था.

यह मशीन जोड़, घटाव के साथ-साथ गुणा व भाग कर सकने में भी समर्थ थी.

चार्ल्स बेबेज का डिफरेंस इंजन (Charles Babbage’s Difference Engine): कैंब्रिज विश्विद्यालय के
गणितज्ञ प्रोफेसर चार्ल्स बेबेज ने इस यंत्र का अविष्कार किया था.

इस मशीन में शाफ़्ट तथा गियर लगे होते थे तथा यह मशीन भाप से चलती थी. इस मशीन की सहायता से
विभिन्न बीजगणितीय फलनों का मान दशमलव के 20 स्थानों तक शुद्धतापूर्वक ज्ञात किया जा सकता है.
बेबेज का एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine of Babbage): डिफरेंस इंजन की सफलता के पश्चात
चार्ल्स बेबेज ने इस यंत्र की रूप रेखा तैयार की, जो आधुनिक युग में प्रयुक्त हो रहे कोम्पुटरों से काफ़ी हद तक
सामान्य है.




एनालिटिकल इंजन एक मैकेनिकल इंजन है. इस यंत्र के मुख्यतः पांच भाग थे जो विभिन्न कार्यों के लिए
प्रयुक्त होते थे.

इनपुट इकाई
स्टोर
मिल
कण्ट्रोल
आउटपुट इकाई

लेडी एडा अगस्टा (Lady Ada Augusta): इन्होंने एनालिटिकल इंजन में पहला प्रोग्राम डाला. इन्हें दुनिया
का प्रथम प्रोग्रामर (Programmer) भी कहा जाता है. इन्हें दो अंको की संख्या प्रणाली बाइनरी प्रणाली (Binary
System) के अविष्कार का श्रेय भी है.

जेकार्ड्स लूम (Jacqard’s Loom): फ्रांस के एक टेक्सटाइल इंजिनियर ‘जेकार्ड्स’ ने कपड़े बुनने के एक लूम
का निर्माण किया जो कपड़ों में स्वत: ही डिजाईन तथा पैटर्न बना देता था. यहाँ आपको बता दे कि जेकार्ड्स लूम
की मुख्यतः दो विशेषताएं थी:

पंचकार्ड के उपयोग से सुचना (Information) तथा निर्देशों (Instruction) को कोडित (Coded) किया जा
सकता था.




पंचकार्ड में कोडित सुचना तथा निर्देशों का समूह एक प्रोग्राम के रूप में कार्य करता था.

सेंसेस टेस्वचालित बुलेटर (Census Tabulator): 1890 में अमेरिका के वैग्यानिक हर्मन होलेरिथ
(Herman Hollerith) ने इस विद्युतचालित यंत्र का अविष्कार किया जिसका प्रयोग अमेरिका जनगणना में
किया गया. इसे पंचकार्ड (Punch Card) के अविष्कार का श्रेय भी दिया जाता है.

मार्क-I (Marc-I): 1937 से 1944 के बीच आईबीएम (IBM-Internation Business Machine) नामक कंपनी
के सहयोग तथा वैग्यानिक हेवार्ड आईकन (Haward Aikan) के निर्देशन में विश्व के प्रथम पूर्ण स्वचालित
विद्युत यांत्रिक (Electro-mechanical) गणना यंत्र का अविष्कार किया गया. इसे मार्क-I नाम दिया गया.

ए.बी.सी. (ABC-Atanasoft-Berry Computer): 1939 में जॉन एटनासॉफ्ट और क्लिफोर्ड बेरी नामक
वैज्ञानिकों ने मिलकर संसार का पहला ‘इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर (Electronic Digital Computer)’ का
अविष्कार किया, इनके ही नाम पर इसे एबीसी (ABC) का नाम दिया गया.




एनिएक (ENIAC-Electronic Numerical Integrator and Calculator): 1946 में अमेरिकी वैज्ञानिक
जे. पी. अकर्ट (J. P Eckert) तथा जॉन मुचली (John Mauchly) ने सामान्य कार्यों के लिए प्रथम पूर्ण
इलेक्ट्रॉनिक (Fully Electronic) कंप्यूटर का अविष्कार किया जिसे एनिएक (ENIAC-Electronic
Numerical Integrator and Calculator) नाम दिया गया.

स्टोर्ड प्रोग्राम कॉन्सेप्ट (EDSAC- Stored Program Concept): स्टोर्ड प्रोग्राम कॉन्सेप्ट के अनुसार
प्रचालन निर्देश (Operating Instruction) और आकड़ा (Data) जिनका प्रोसेसिंग में उपयोग हो रहा है, उसे
कंप्यूटर में स्टोर्ड होना चाहिए और आवश्कतानुसार प्रोग्राम के क्रियान्वयन (Execution) के समय रूपांतरित
होना चाहिए.

इडवैक (EDVAC- Electronic Discrete Variable Automatic Computer): एनिएक कंप्यूटर में
प्रोग्राम में परिवर्तन कठिन था. इससे निपटने के लिए वान न्यूमेन (Van Neumann) ने संगृहित प्रोग्राम (
Stored Program) की अवधारणा दी तथा इडवैक का विकास किया.



Computer का इतिहास लगभग 3000 वर्ष पुराना है| जब चीन में एक calculation Machine Abacus का

अविष्कार हुआ था यह एक Mechanical Device है जो आज भी चीन, जापान सहित एशिया के अनेक देशो में
अंको की गणना के लिए काम आती थी| Abacus तारों का एक फ्रेम होता हैं इन तारो में बीड (पकी हुई मिट्टी के
गोले) पिरोये रहते हैं प्रारंभ में Abacus को व्यापारी Calculation करने के काम में Use किया करते थे यह
Machine अंको को जोड़ने, घटाने, गुणा करने तथा भाग देने के काम आती हैं|

शताब्दियों के बाद अनेक अन्य यांत्रिक मशीने अंकों की गणना के लिए विकसित की गई । 17 वी शताब्दी में
फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल (Baize Pascal) ने एक यांत्रिक अंकीय गणना यंत्र (Mechanical Digital
Calculator) सन् 1645 में विकसित किया गया । इस मशीन को एंडिंग मशीन (Adding Machine) कहते थे,
क्योकि यह केवल जोड़ या घटाव कर सकती थी । यह मशीन घड़ी और ओडोमीटर के सिद्धान्त पर कार्य करती
थी । उसमें कई दाँतेयुक्त चकरियाँ (toothed wheels) लगी होती थी जो घूमती रहती थी चक्रियों के दाँतो पर 0
से 9 तक के अंक छपे रहते थे प्रत्येक चक्री का एक स्थानीय मान होता था जैसे –इकाई, दहाई, सैकड़ा आदि
इसमें एक चक्री के घूमने के बाद दूसरी चक्री घूमती थी Blase Pascal की इस Adding Machine को
Pascaline भी कहते हैं|

सन् 1801 में फ्रांसीसी बुनकर (Weaver) जोसेफ जेकार्ड (Joseph Jacquard) ने कपड़े बुनने के ऐसे लूम
(Loom) का अबिष्कार किया जो कपड़ो में डिजाईन (Design) या पैटर्न (Pattern) को कार्डबोर्ड के छिद्रयुक्त
पंचकार्डो से नियंत्रित करता था | इस loom की विशेषता यह थी की यह कपडे के Pattern को Cardboard के
छिद्र युक्त पंचकार्ड से नियंत्रित करता था पंचकार्ड पर चित्रों की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति द्वारा धागों को
निर्देशित किया जाता था|

कप्यूटर के इतिहास में 19 वी शताब्दी को प्रारम्भिक समय का स्वर्णिम युग माना जाता है । अंग्रेज गणितज्ञ
Charles Babbage ने एक यांत्रिक गणना मशीन (Mechanical Calculation Machine) विकसित करने की
आवश्यकता तब महसूस की जब गणना के लिए बनी हुई सारणियों में Error आती थी चूँकि यह Tables हस्त
निर्मित (Hand-set) थी इसलिए इसमें Error आ जाती थी |

चार्ल्स बैबेज ने सन् 1822 में एक मशीन का निर्माण किया जिसका व्यय ब्रिटिश सरकार ने वहन किया । उस
मशीन का नाम डिफरेंस इंजिन (Difference Engine) रखा गया, इस मशीन में गियर और साफ्ट लगे थे । यह
भाप से चलती थी । सन् 1833 में Charles Babbage ने Different Engine का विकसित रूप Analytical
Engine तैयार किया जो बहुत ही शक्तिशाली मशीन थी | बैवेज का कम्प्यूटर के विकास में बहुत बड़ा योगदान
रहा हैं । बैवेज का एनालिटिकल इंजिन आधुनिक कम्प्यूटर का आधार बना और यही कारण है कि चार्ल्स बैवेज
को कमप्यूटर विज्ञान का जनक कहा जाता हैं |



सन् 1940 में विद्युत यांत्रिक कम्प्यूटिंग (Electrometrical Computing) शिखर पर पहुँच चुकी थी ।IBM के
चार शीर्ष इंजीनियरों व डॉ. हॉवर्ड आइकेन ने सन् 1944 में एक मशीन विकसित किया यह विश्व का सबसे
पहला “विधुत यांत्रिक कंप्यूटर” था और इसका official Name– Automatic Sequence Controlled
Calculator रखा गया। इसे हार्वर्ड विश्वविद्यालय को सन् 1944 के फरवरी माह में भेजा गया जो
विश्वविद्यालय में 7 अगस्त 1944 को प्राप्त हुआ | इसी विश्वविद्यालय में इसका नाम मार्क- I पड़ा| यह 6
सेकंड में 1 गुणा व 12 सेकंड में 1 भाग कर सकता था|

सन् 1945 में एटानासोफ़ (Atanasoff) तथा क्लोफोर्ड बेरी (Clifford berry) ने एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन का
विकास किया जिसका नाम ए.बी.सी.(ABC) रखा गया| ABC शब्द Atanasoff Berry Computer का संक्षिप्त
रूप हैं | ABC सबसे पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर (Electronic Digital Computer) था |

 

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